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1st PUCगद्य / संस्मरण रेखाचित्रसाहित्य वैभव, गद्य भाग

बिन्दा

by महादेवी वर्मा

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'बिन्दा' महादेवी वर्मा का एक कारुणिक और हृदयविदारक संस्मरण-रेखाचित्र है, जो सौतेली माँ के अत्याचारों से पीड़ित एक अनाथ बच्ची की व्यथा तथा बाल-शोषण की यथार्थ अभिव्यक्ति है। लेखिका की बचपन की सहेली बिन्दा दिनभर घर का कठिन काम करती है और ज़रा सी भूल पर बेरहमी से पीटी जाती है। उबलते दूध से पैर जलने पर भी उसे अँधेरी कोठरी में छिपा दिया जाता है और अंत में चेचक (शीतला रोग) के कारण बिना इलाज के वह दम तोड़ देती है।

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लेखिका अपने बचपन की सहेली बिन्दा का परिचय देती हैं, एक दुबली-पतली, डरी-सहमी, शांत स्वभाव की लड़की। बिन्दा की माँ का देहांत हो चुका था और पिता 'पंडित जी' ने दूसरा विवाह कर लिया था; घर में आई नई महिला को बिन्दा 'नयी अम्मा' कहती थी।

सौतेली माँ के अत्याचार

नयी अम्मा अपने बेटे मोहन को सोने के पालने में झुलातीं, रेशमी वस्त्र पहनातीं और मलाई खिलातीं, जबकि बिन्दा से तड़के उठकर ठंडे पानी से बर्तन मांजना, झाड़ू-पोछा, गोबर साफ करना और भारी घड़ों में पानी भरवाना जैसे काम कराती थीं। ज़रा-सी भूल पर वे उसे बालों से पकड़कर घसीटतीं और चिमटे-डंडे से पीटतीं; पिता मूक दर्शक बने रहते।

जलना और अकाल मृत्यु

एक दिन गर्म पतीली उतारते समय उबलता दूध बिन्दा के पैरों पर गिर गया और बड़े-बड़े छाले पड़ गए; पर इलाज के बजाय नयी अम्मा ने उसे अँधेरी कोठरी में भूसे के ढेर पर छिपा दिया। कुछ दिनों बाद बिन्दा को गंभीर चेचक (शीतला रोग) हो गया और स्नेह, दवा तथा पोषण के अभाव में वह मासूम बच्ची कोठरी में ही तड़प-तड़प कर मर गई। लेखिका का बाल-मन इस अन्याय से आहत हो उठता है।