दिल का दौरा और एनजाइना
by डॉ. यतीश अग्रवाल
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'दिल का दौरा और एनजाइना' चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. यतीश अग्रवाल का स्वास्थ्य-जागरूकता संबंधी लेख है, जो हृदय रोग के दो रूपों, एनजाइना और हार्ट अटैक, के कारण, लक्षण, उपचार और बचाव सरल भाषा में समझाता है। कोरोनरी धमनियों में वसा जमने से रक्त-प्रवाह बाधित होता है; एनजाइना आंशिक रुकावट का छाती-दर्द है जो आराम से ठीक हो जाता है, जबकि दिल का दौरा रक्त-प्रवाह पूरी तरह बंद होने से जानलेवा होता है। प्राथमिक उपचार में जीभ के नीचे 'सॉर्बिट्रेट' की गोली रखना और तुरंत डॉक्टर बुलाना आवश्यक है।
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लेखक बताते हैं कि हृदय एक संवेदनशील, अनवरत काम करने वाला पंप है जो पूरे शरीर को ऑक्सीजन-युक्त रक्त पहुँचाता है; उसकी अपनी मांसपेशियों को ऑक्सीजन कोरोनरी धमनियों से मिलती है। अस्वस्थ जीवनशैली और तनाव से जब इन धमनियों में वसा (Cholesterol) जमती है, तो वे संकुचित हो जाती हैं और हृदय को पर्याप्त रक्त नहीं मिलता।
एनजाइना और दिल का दौरा
एनजाइना दिल के दौरे की पहली चेतावनी है, कठिन काम (सीढ़ी चढ़ना, दौड़ना) के समय पर्याप्त रक्त न मिलने से छाती के बाईं ओर भारीपन और दर्द होता है, जो आराम करने या जीभ के नीचे सॉर्बिट्रेट की गोली रखने पर ठीक हो जाता है। दिल का दौरा तब पड़ता है जब धमनी में खून का थक्का जमने से रक्त-प्रवाह पूरी तरह रुक जाता है और हृदय की मांसपेशी का हिस्सा नष्ट होने लगता है; इसका दर्द तीव्र, असहनीय और जानलेवा होता है, साथ में पसीना, घबराहट और साँस की कठिनाई होती है।
कारण, बचाव और उपचार
प्रमुख कारण हैं, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अत्यधिक तनाव, धूम्रपान-शराब, वसायुक्त भोजन और शारीरिक निष्क्रियता। रोग का पता ई.सी.जी. और कोरोनरी एंजियोग्राफी से लगाया जाता है; इलाज के रूप में बाईपास सर्जरी और बैलून एंजियोप्लास्टी की जाती है। बचाव हेतु नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, धूम्रपान त्याग और तनावमुक्त जीवन आवश्यक है। दौरा पड़ने पर रोगी को सीधा लिटाकर तुरंत डॉक्टर बुलाना और सॉर्बिट्रेट देना चाहिए।
