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Class 11पद्य / दोहे (Poem / Couplets)

मध्ययुगीन काव्य (कबीर व तुलसीदास के दोहे)

by कबीरदास / तुलसीदास

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कबीरदास बाह्य आडंबरों, अंधविश्वासों व सामाजिक बुराइयों पर तीखा प्रहार करते हैं और मन की पवित्रता तथा ईश्वर के प्रति सच्चे प्रेम को ही वास्तविक धर्म मानते हैं। तुलसीदास नीति, मर्यादा, प्रेम, परोपकार व मीठी वाणी का महत्त्व दर्शाते हैं, कोमल वचन शांति फैलाते हैं जबकि कठोर वचन विष के समान होते हैं।

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कबीर व तुलसी के दोहे

कबीर की सधुक्कड़ी भाषा में बाह्य आडंबर और पाखंड की कड़ी आलोचना है; वे प्रेम और मन की पवित्रता को ही सच्चा धर्म मानते हैं। तुलसीदास की साहित्यिक अवधी भाषा में नीति, मर्यादा और मीठी वाणी का महत्त्व झलकता है। दोहों की गेयता और छंद विधान इस पाठ को बेजोड़ बनाते हैं।