Class 12पद्य / लोकगीत (Poem / Folk Songs)
लोकगीत (सुनु रे सखिया और कजरी)
by पारंपरिक लोकगीत
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'सुनु रे सखिया' ग्रामीण महिलाओं द्वारा सावन में गाया जाने वाला गीत है, जिसमें झूला झूलने व वर्षा ऋतु के आनंद का वर्णन है। 'कजरी' पूर्वी उत्तर प्रदेश व बिहार का प्रसिद्ध वर्षा-ऋतु लोकगीत है, जो प्रकृति सौंदर्य व विरह-वेदना दर्शाता है।
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सावन के लोकगीत
'सुनु रे सखिया' में सावन के आगमन का वर्णन है, बागों में झूले पड़ गए, कोयल मीठे स्वर में कूक रही है, महिलाएँ सज-धजकर कजरी गाने व झूला झूलने घर से बाहर आ रही हैं।
'कजरी' में काले-काले बादल, पंख फैलाकर नाचते मोर व टर्राते मेंढक का वर्णन है। यह ऋतु विरह से पीड़ित पत्नियों के लिए पति के आगमन की प्रतीक्षा का प्रतीक है। लोकगीत ग्रामीण समाज की सादगी, एकता व उत्सवधर्मिता को उकेरते हैं।
