Class 12गद्य / निबंध (Prose / Essay)
पाप के चार हथियार
by कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर'
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लेखक समझाते हैं कि जब कोई सुधारक समाज की बुराइयाँ दूर करने आता है, तो पापी समाज पहले उसकी 'उपेक्षा' करता है, फिर 'निंदा', फिर 'हत्या' और अंत में उसके विचारों को दफनाने के लिए 'श्रद्धा' का चौथा व सबसे खतरनाक हथियार अपनाता है।
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पाप के चार हथियार
यह निबंध समाज की विडंबना व पाखंड पर करारा प्रहार करता है। प्रारंभ में सुधारक की उपेक्षा की जाती है; सफल होने पर उसकी निंदा करके छवि खराब की जाती है; न रुकने पर भौतिक हत्या कर दी जाती है; और अंत में उसकी पूजा (श्रद्धा) करके क्रांतिकारी विचारों को निष्क्रिय कर दिया जाता है।
