Class 10 (Secondary)कविताहिन्दी माध्यमिक पाठ्यक्रम

इसे जगाओ

by भवानीप्रसाद मिश्र

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'इसे जगाओ' भवानीप्रसाद मिश्र की एक प्रेरक कविता है, जिसमें कवि सूरज, हवा और पक्षियों को आत्मीय भाव से पुकारकर एक 'सोए हुए' आदमी को जगाने की विनती करता है, 'भई, सूरज! ज़रा इस आदमी को जगाओ; भई, पवन! इसे हिलाओ; भई, पंछी! इसके कानों पर चिल्लाओ।' यह आदमी नींद में नहीं सोया, बल्कि अपने आसपास की सच्चाई से बेख़बर होकर दिवास्वप्नों में खोया पड़ा है। कवि सूरज से कहता है कि उसमें क्रियाशीलता की गरमी भर दे, हवा उसे हिलाकर हरकत में लाए और पक्षी उसके कानों पर चिल्लाकर उसका ध्यान सपनों की दुनिया से वास्तविक जीवन की ओर मोड़ दे। कवि चेतावनी देता है कि उसे 'वक्त पर' जगाओ, वरना जब वह 'बेवक्त' जागेगा तो आगे निकल गए लोगों को पाने के लिए घबराकर भागेगा। पर घबराकर भागना और तेज़ (क्षिप्र) गति अलग-अलग हैं, सच्चा क्षिप्र तो वही है 'जो सही क्षण में सजग है।' कविता का संदेश है कि हमें समय के सच को पहचानकर, सही समय पर सजग और सक्रिय होकर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए, केवल कल्पना और दिवास्वप्नों में समय नहीं गँवाना चाहिए।

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सूरज, हवा और पक्षी से आह्वान

कवि प्रकृति के तीन जीवनदायी तत्त्वों, सूरज, हवा और पक्षियों, को अत्यंत आत्मीय भाव से पुकारता है कि वे इस सोए हुए आदमी को जगाएँ, हिलाएँ और उसके कानों पर चिल्लाएँ। सूरज जीवन और ऊष्मा देता है, हवा सदा गतिशील रहती है और पक्षियों का कलरव प्रकृति के जीवंत होने का प्रतीक है, कवि चाहता है कि ये तीनों मिलकर उस निष्क्रिय व्यक्ति में सक्रियता भर दें।

सोया आदमी, सपनों में खोया

यह आदमी नींद में नहीं, बल्कि सच से बेख़बर होकर दिवास्वप्नों में खोया 'सोया' है, वह अपने समय और समाज की सच्चाई नहीं पहचानता। कवि स्पष्ट करता है कि सपने देखना (भविष्य के लिए) अच्छा है, पर सपनों में खोए रहना निष्क्रियता है; ऐसा व्यक्ति सपने साकार करने का समय ही खो देता है, जैसे शेखचिल्ली या 'मुंगेरीलाल' अपना सर्वस्व गँवा देते हैं।

सही क्षण में सजगता

कवि चेतावनी देता है कि उसे 'वक्त पर' जगाओ, वरना 'बेवक्त' जागकर वह आगे बढ़ गए लोगों को पाने के लिए घबराकर भागेगा। पर घबराकर भागना और क्षिप्र (तेज़) गति एक नहीं, सच्चा क्षिप्र वही है 'जो सही क्षण में सजग है।' अर्थात् सफलता समय पर की गई सजग सक्रियता से मिलती है, न कि देर से की गई घबराहट-भरी दौड़ से।