सुखी राजकुमार
by ऑस्कर वाइल्ड
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'सुखी राजकुमार' ऑस्कर वाइल्ड की एक मार्मिक अनूदित कहानी है, जो त्याग, करुणा और परोपकार का संदेश देती है। नगर के ऊँचे स्तंभ पर सुखी राजकुमार की सोने-मढ़ी प्रतिमा है, जिसकी आँखें नीलम की और तलवार की मूठ में एक बड़ा लाल (माणिक) जड़ा है। एक गौरैया (मूल कहानी में अबाबील/स्वैलो) रात को उसके पैरों के पास ठहरती है और देखती है कि राजकुमार रो रहा है। राजकुमार बताता है कि जीवित रहते हुए वह 'आनंद-महल' में रहा, जहाँ दुख का प्रवेश निषिद्ध था; पर मरने के बाद ऊँचाई पर स्थापित होकर अब वह नगर का सारा दुख और कुरूपता देख सकता है, इसलिए उसका जस्ते का हृदय फटा जा रहा है। वह गौरैया से विनती करता है कि वह उसका लाल एक बीमार बच्चे की गरीब दर्जिन माँ को, फिर अपनी नीलम आँखें एक भूखे नाटककार और एक माचिस बेचने वाली लड़की को, और अंत में शरीर का सारा सोना नगर के गरीबों को बाँट आए। इस सेवा में जुटी गौरैया मिस्र (गरम देश) जाना टाल देती है और अंततः कड़ाके की सर्दी में राजकुमार के पैरों पर मर जाती है; उसी क्षण राजकुमार का सीसे का हृदय भी टूट जाता है। अब कुरूप हो चुकी मूर्ति गिरा दी जाती है। ईश्वर जब अपने दूत से नगर की दो सबसे बहुमूल्य चीज़ें लाने को कहता है, तो दूत वही टूटा हृदय और मरी हुई गौरैया ले आता है, और ईश्वर उन्हें अपने स्वर्ग-उद्यान में सदा के लिए सम्मान देता है। कहानी सिखाती है कि सच्चा सुख भोग-विलास में नहीं, दूसरों के लिए त्याग और सेवा में है।
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राजकुमार के आँसू
नगर के ऊँचे स्तंभ पर खड़ी सुखी राजकुमार की सोने-मढ़ी सुंदर प्रतिमा की आँखें नीलम की और तलवार की मूठ में एक बड़ा लाल जड़ा है। एक थकी गौरैया रात को उसके पैरों के पास ठहरती है और उस पर पानी की बूँदें गिरने पर ऊपर देखती है, राजकुमार रो रहा है। राजकुमार बताता है कि जीवित रहते वह दुख से अछूते 'आनंद-महल' में रहा, पर अब ऊँचाई पर खड़ा होकर नगर का सारा दुख देखकर उसका हृदय फटा जा रहा है।
गौरैया के द्वारा दान
राजकुमार की विनती पर गौरैया उसका लाल एक बीमार, भूखे बच्चे की गरीब दर्जिन माँ को पहुँचाती है। फिर वह राजकुमार की एक-एक नीलम आँख भूख से जूझते एक युवा नाटककार और माचिस बेचने वाली एक लड़की को दे आती है, जिससे राजकुमार अंधा हो जाता है। अंत में गौरैया उसके शरीर का सारा सोना नोच-नोचकर नगर के भूखे बच्चों और गरीबों में बाँट आती है।
बलिदान और स्वर्गिक सम्मान
इस सेवा में लगी गौरैया मिस्र (गरम देश) जाना टाल देती है और कड़ाके की सर्दी में राजकुमार को चूमकर उसके पैरों पर मर जाती है; उसी क्षण राजकुमार का सीसे का हृदय दो टुकड़े हो जाता है। कुरूप हुई मूर्ति गिरा दी जाती है, पर उसका टूटा हृदय भट्ठी में भी नहीं पिघलता। जब ईश्वर अपने दूत से नगर की दो सबसे बहुमूल्य चीज़ें लाने को कहता है, तो दूत वही टूटा सीसे का हृदय और मरी गौरैया ले आता है, और ईश्वर उन्हें अपने स्वर्ग में सदा के लिए स्थान देता है।
