उनको प्रणाम
by नागार्जुन
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'उनको प्रणाम' नागार्जुन की एक भावपूर्ण कविता है, जिसमें कवि उन असफल, अनाम और उपेक्षित संघर्षशील व्यक्तियों को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करते हैं, जिन्होंने अपने लक्ष्य के लिए पूरा परिश्रम और त्याग किया, पर किन्हीं कारणों से 'पूर्ण-काम' (सफल) नहीं हो सके। कवि प्रणाम करते हैं, उन वीरों को जिनके अभिमंत्रित तीर लक्ष्य से चूक गए और जो युद्ध की समाप्ति से पहले ही 'रिक्त तूणीर' (खाली तरकश) हो गए; उन्हें जो छोटी-सी नैया लेकर समुद्र पार करने उतरे और मन की इच्छा मन में ही रह गई, वे उसी में समा गए; उन्हें जो ऊँचे शिखर की ओर उत्साह से बढ़े पर किसी ने हिम-समाधि ले ली और कोई असफल होकर नीचे उतर आया; उन्हें जो कृतकृत्य न हो सके बल्कि फाँसी पर झूल गए और जिन्हें दुनिया कुछ ही दिनों में भूल गई; उन्हें जो दृढ़ संकल्प और दुर्दम साहस के साक्षात उदाहरण थे, पर जिनकी धुन को अंतहीन बंदी-जीवन (कारावास) ने समाप्त कर दिया; और उन्हें भी जिनकी सेवाएँ अतुलनीय थीं पर जो विज्ञापन (प्रचार) से दूर रहे और जिनके मनोरथ प्रतिकूल परिस्थितियों ने चूर-चूर कर दिए। कविता का संदेश है कि किसी व्यक्ति की महानता केवल उसकी सफलता से नहीं, बल्कि उसके निष्ठापूर्ण प्रयास, त्याग और संघर्ष से आँकी जानी चाहिए, इसलिए हमें असफल पर संघर्षशील और अनाम बलिदानियों का भी आदर करना चाहिए।
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असफल वीरों और स्वप्नद्रष्टाओं को प्रणाम
कवि उन लोगों को प्रणाम करते हैं जो 'पूर्ण-काम' (सफल) नहीं हो सके, जिनके अभिमंत्रित तीर लक्ष्य से चूक गए और जो युद्ध की समाप्ति से पहले ही रिक्त तूणीर (खाली तरकश) हो गए। वे उन्हें भी नमन करते हैं जो छोटी-सी नैया लेकर समुद्र पार करने उतरे, पर मन की इच्छा मन में ही रह गई और वे उसी समुद्र में समा गए।
शिखर के साधक और बलिदानी
कवि उन्हें प्रणाम करते हैं जो ऊँचे शिखर की ओर नए-नए उत्साह से बढ़े, पर किसी ने हिम-समाधि ले ली और कोई असफल होकर नीचे उतर आया। वे उन शहीदों को भी नमन करते हैं जो कृतकृत्य न हो सके बल्कि फाँसी पर झूल गए, और जिन्हें यह दुनिया कुछ ही दिनों में भूल गई।
बंदी संकल्प और अनाम सेवक
कवि उन्हें प्रणाम करते हैं जो दृढ़ व्रत और दुर्दम साहस के साक्षात उदाहरण थे, पर जिनकी धुन को अंतहीन बंदी-जीवन (कारावास) ने समाप्त कर दिया। अंत में वे उन अनाम सेवकों को नमन करते हैं जिनकी सेवाएँ अतुलनीय थीं, पर जो प्रचार-प्रसिद्धि से दूर रहे और जिनके मनोरथ प्रतिकूल परिस्थितियों ने चूर-चूर कर दिए।
