Sahitya VaibhavRapid Learn logoRapid Learn
1st PUCगद्य / हास्य-प्रधान एकांकीसाहित्य वैभव, गद्य भाग

रिहर्सल

by ओमप्रकाश 'आदित्य'

Rapid Learn 2-Minute Revision

Perfect for last-minute revision

2-Minute Revision Video

Video coming soon

'रिहर्सल' ओमप्रकाश 'आदित्य' का एक मनोरंजक हास्य-प्रधान एकांकी है, जो चिकित्सा पद्धतियों के पाखंड और उनके आपसी टकराव पर मीठा व्यंग्य करता है। पारंपरिक वैद्य परमानन्द हर रोग का इलाज 'अमर भास्कर चूर्ण' से करते हैं, जबकि आधुनिक मनोचिकित्सक प्रोफेसर पांडुरंग हर बीमारी को मन का वहम मानते हैं। हास्यास्पद घटनाओं के बाद अंत में पता चलता है कि बीमार होने का नाटक वास्तव में स्कूल के वार्षिक नाटक की 'रिहर्सल' थी।

Detailed Summary

Detailed Summary Video

Video coming soon

एकांकी का पहला दृश्य वैद्य परमानन्द के क्लिनिक से आरंभ होता है, जहाँ 'अमर भास्कर चूर्ण' की शीशियाँ रखी हैं और वे हर मरीज को यही चूर्ण-काढ़ा देते हैं। एक बीमार स्त्री (कमला) पेट-दर्द की शिकायत लेकर आती है; वैद्य जी नाड़ी देखकर उसे पित्त का रोग बताकर चूर्ण दे देते हैं।

किसान और मनोचिकित्सक

तभी एक गरीब किसान अपनी बीमार 'गाय' के बारे में बताने आता है, पर वैद्य जी उसे मनुष्य समझकर चूर्ण दे देते हैं। दूसरे दृश्य में आधुनिक मनोचिकित्सक प्रोफेसर पांडुरंग मानते हैं कि कोई बीमारी वास्तविक नहीं, सब मन का वहम है; वे उसी स्त्री को सम्मोहन (Hypnotism) से घने जंगल में शेर की कल्पना कराते हैं जिससे वह डरकर भाग जाती है।

हास्यपूर्ण अंत

तीसरे दृश्य में एक घर में बारह वर्षीय रमेश खाट पर अचेत पड़ा है और माँ रो रही है; वैद्य और प्रोफेसर उसकी बीमारी को लेकर आपस में झगड़ते हैं, एक इसे सन्निपात, दूसरा स्नायु-रोग बताता है। तभी रमेश अचानक उठकर बताता है कि वह बीमार नहीं है, बल्कि स्कूल के नाटक में दो घंटे बेहोश रहने के अभिनय की 'रिहर्सल' कर रहा था। यह सुनकर दोनों 'डॉक्टर' शर्मिंदा होकर चले जाते हैं और एकांकी हास्य के साथ समाप्त होती है।