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Class 11पद्य / उर्दू गज़ल (Poem / Urdu Ghazal)

गज़लें (दोस्ती और मौजूद)

by डॉ. राहत इंदौरी

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पहली गज़ल में कवि मित्र की सलाह का सम्मान करने और दोस्ती को जीवन की सर्वोत्तम पूँजी मानने की बात करते हैं। दूसरी गज़ल आधुनिक समाज के दोमुँहेपन पर करारा व्यंग्य करती है, लोग जो भीतर से होते हैं, बाहर से वैसा नहीं दिखते।

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दोस्ती व सामाजिक पाखंड

गज़ल १ (दोस्ती): सच्ची दोस्ती वही है जहाँ अपनी बात रखने की पूरी आज़ादी हो। मित्र की कड़वी बातें भी हमारा भला चाहती हैं; कवि दिल को सबसे बड़ा हरीफ (सच्चा साथी) मानने की सलाह देते हैं।

गज़ल २ (मौजूद): वर्तमान की प्रदर्शन प्रवृत्ति व दोगलेपन पर कटाक्ष है। सीधे-निश्छल लोगों को कमजोर समझा जाता है जबकि चालाक-पाखंडी राज करते हैं। कवि युवाओं को पाखंड के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देते हैं।