स्वागत है!
by श्याम दानीश्वर
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मॉरीशस के प्रवासी हिंदी कवि श्याम दानीश्वर अपने उन पूर्वजों को याद करते हैं जिन्हें अंग्रेज 'गिरमिटिया मजदूर' बनाकर गन्ने के खेतों में ले गए थे। पूर्वजों के खून-पसीने से सींची मॉरीशस की धरती पर आज भारत से कोई अतिथि आता है तो उसका भावभीना स्वागत किया जाता है।
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गिरमिटिया संघर्ष व स्वागत
१८वीं-१९वीं सदी में अंग्रेज भारत के गरीब किसानों को झांसा देकर मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम जैसे द्वीपों में बंधुआ ('गिरमिटिया') मजदूर बनाकर ले गए। पूर्वजों ने कोड़े खाकर, भूखे-प्यासे रहकर बंजर धरती को स्वर्ग जैसा सुंदर देश बनाया।
आज मॉरीशस में हिंदी भाषा व भारतीय संस्कृति सुरक्षित है। भारत (मातृभूमि) से कोई आता है तो प्रवासी बाहें फैलाकर स्वागत करते हैं क्योंकि वे उन्हें अपनी जड़ों जैसा महसूस करते हैं।
