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Class 12पद्य / शेर-गज़ल (Poem / Ghazal Couplets)

चुनिंदा शेर

by कैलाश सेंगर

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कैलाश सेंगर के शेर रूमानियत से हटकर ज़मीनी हकीकत पर बात करते हैं। एक मार्मिक शेर कहता है, 'वह जो मजदूर मरा है, वह निरक्षर था मगर, अपने भीतर वह रोज़ इक किताब लिखता था।' शेर गरीब किसानों-मजदूरों की विवशता व सामाजिक असमानता को उजागर करते हैं।

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ज़मीनी हकीकत के शेर

एक शेर कर्ज के बोझ तले दबे गरीब की स्थिति दिखाता है, 'साँस हमारी हमें पराये धन-सी लगती है, साहुकार के घर गिरवी कंगन-सी लगती है।' दूसरा शेर ईश्वर से समान वितरण की प्रार्थना करता है, 'किसी का सर खुला है तो किसी के पाँव बाहर हैं, जरा ढंग से तू अपनी चादरों को बुन मेरे मालिक।'

तीसरा शेर मजदूर की गाथा है, वह निरक्षर था, पर भूख व मेहनत के अनुभवों से रोज़ अपने भीतर संघर्ष की एक अदृश्य किताब लिखता था।