ओजोन विघटन का संकट
by डॉ. कृष्ण कुमार मिश्र
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वायुमंडल में स्थित ओजोन (O3) की परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को सोखकर हमारी रक्षा करती है। फ्रिज-एसी में प्रयुक्त CFC गैस ओजोन अणुओं को तेजी से नष्ट कर रही है, जिससे ओजोन परत में छिद्र हो गया। इस संकट से निपटने हेतु 'मॉन्ट्रियल संधि' पर हस्ताक्षर हुए।
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ओजोन परत व CFC का खतरा
ओजोन गैस १५–३५ किमी की ऊँचाई पर सुरक्षा-छतरी की तरह फैली है; इसके बिना पराबैंगनी किरणें त्वचा-कैंसर, अंधापन व पेड़-पौधों का विनाश करतीं। १९३० के दशक में खोजी गई CFC गैस ऊपर जाकर सूर्य की किरणों से क्लोरीन परमाणु छोड़ती है, और एक क्लोरीन परमाणु ओजोन के लाख अणु नष्ट कर देता है।
इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'मॉन्ट्रियल संधि (Montreal Protocol)' पर हस्ताक्षर कर CFC उत्पादन पर प्रतिबंध लगाया गया।
