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Class 12पद्य / नई कविता (Poem / Modern Poetry)

पेड़ होने का अर्थ

by डॉ. मुकेश गौतम

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पेड़ केवल लकड़ी का ढांचा नहीं, बल्कि जीवन का सबसे बड़ा दाता, रक्षक व शिक्षक है। पेड़ की तुलना ऋषि दधीचि से की गई है जिन्होंने लोक-कल्याण हेतु अपनी अस्थियाँ दान कीं। पेड़ स्वार्थी मनुष्य की कुल्हाड़ी सहकर भी बदले में शुद्ध ऑक्सीजन, फल-फूल व छाँव देता है।

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पेड़ का परोपकार

कवि कहते हैं कि पेड़ की जड़, तना, शाखा, पत्ती, पुष्प, फल व बीज, हर चीज़ समाज के कल्याण को समर्पित है। मनुष्य स्वार्थवश पेड़ पर कुल्हाड़ी चलाता है, पर पेड़ बदले में क्रोध नहीं करता; वह हमारी ज़हरीली हवा सोखकर जीवनदायी ऑक्सीजन देता है।

पेड़ बीमारी की दवा, उत्सव-दुख के फूल-फल, पशु-पक्षियों को आश्रय व मुसाफिरों को छाँव देता है। कवि पेड़ को आधुनिक 'संत' व पौराणिक 'दधीचि' मानते हैं जो अपने कण-कण को दूसरों के लिए होम कर देता है।